उत्तराखंड के प्रमुख त्यौहार Festivals Of Uttarakhand
दीपावली
स्थानीय भाषा में इसे बग्वाल कहा जाता है इस अवसर पर ऐपण चित्रकारी की जाती है इस दिन गाय की पूजा की जाती है,व रात को भैला नृत्य का आयोजन होता है।
होली
राज्य में होली दो शैलियों में प्रचलित है
- खड़ी होली - खड़ी होली का आयोजन बच्चों द्वारा किया जाता है।
- बैठकी होली
घी संक्रांति
इसे ओलधिया भी कहते हैं
ओलधिया - चंद्र शासनकाल में स्थानीय लोग इस दिन राजा को भेंट प्रदान करते थे।
मकर सक्रांति
इस दौरान उत्तरायणी का मेला लगता है माघ माह में कुमाऊं क्षेत्र में आटे के टेढ़े मेढ़े घुघूती बनाए जाते हैं इसे काले कौवे का त्यौहार भी कहा जाता है
पंचमी
माघ माह में जौ के पत्ते की पूजा कर के मंदिर में चढ़ाए जाते हैं।
फूलदेई
यह बसंत के आगमन का त्यौहार होता है यह चैत्र मास में मनाया जाता है बच्चे टोकरियों में फूल लेकर घर में डालते हैं।
विखयोति
यह जौनसारी जनजाति द्वारा मनाया जाता है, यह त्यौहार बैशाख के पहले दिन मनाया जाता है।
हरेला
यह कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख त्यौहार है, जो श्रावण मास के पहले दिन मनाया जाता है।
खुतपुडा
कुमाऊं क्षेत्र में अश्विन मास की संक्रांति को खुतपुडा मनाया जाता है।
जन्मों-पुण्यों त्योहार-
यह त्योहार श्रावण पूर्णिमा के दिन ब्राह्मण अपने यजमान को यज्ञोपवित व यजमान ब्राह्मणों को दक्षिणा देकर मनाते हैं।
बैसी
इस त्योहार में श्रावण मास में 22 दिन तक धार्मिक आयोजन होता है जिसमें सात्विक जीवन जीना होता है
कलाई त्यौहार
यह त्यौहार कुमाऊं क्षेत्र में फसल कटाई में मनाया जाता है
जागडा
यह महासू देवता का त्यौहार है जो भाद्र माह में मनाया जाता है।
बुवाई
यह त्यौहार उत्तराखंड क्षेत्र में ग्रीष्म काल में मनाया जाता है इसे मछमणो त्योहार भी कहा जाता है।
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